गाय-भैंस के ब्याने के बाद होने वाले रोग: मिल्क फीवर, जेर रुकना और थनैला से कैसे बचें?

अक्टूबर 9, 2026 · meenakshi jindal

गाय-भैंस के ब्याने के बाद होने वाले रोग: मिल्क फीवर, जेर रुकना और थनैला से कैसे बचें?

पशुपालक के लिए गाय या भैंस का ब्याना खुशी का मौका होता है, क्योंकि नया बच्चा आता है और दूध उत्पादन शुरू होता है। लेकिन ब्याने के बाद के पहले 2 से 3 हफ्ते पशु के लिए सबसे नाज़ुक समय होते हैं। इस दौरान पशु का शरीर कमज़ोर होता है, उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) गिर जाती है और वह कई बीमारियों की चपेट में आ सकता है।

इस ब्लॉग में हम सरल भाषा में जानेंगे कि ब्याने के बाद कौन-कौन से रोग होते हैं, उनके लक्षण क्या हैं, और उनसे कैसे बचा जाए।

ब्याने के बाद पशु बीमार क्यों पड़ता है?

सीधा उत्तर: ब्याने के बाद पशु के शरीर से बहुत सारा कैल्शियम, ऊर्जा और पोषक तत्व दूध और बच्चे के लिए खर्च हो जाते हैं। साथ ही प्रसव की थकान से इम्युनिटी कमज़ोर हो जाती है, इसलिए संक्रमण और कमी वाले रोग आसानी से हो जाते हैं।

मुख्य कारण:

  • शरीर में कैल्शियम की अचानक कमी
  • ब्याने से पहले और बाद में संतुलित आहार का न मिलना
  • गंदगी और साफ-सफाई की कमी
  • प्रसव के समय हुआ तनाव और थकान
  • खनिज लवण (मिनरल्स) और विटामिन की कमी

1. मिल्क फीवर (दुग्ध ज्वर)

मिल्क फीवर क्या है?

मिल्क फीवर (दुग्ध ज्वर) एक ऐसी बीमारी है जिसमें ब्याने के बाद पशु के खून में कैल्शियम की मात्रा अचानक घट जाती है। नाम में "फीवर" है, लेकिन इसमें असल में बुखार नहीं होता, बल्कि शरीर ठंडा पड़ने लगता है।

मिल्क फीवर कब होता है?

आमतौर पर ब्याने के 24 से 72 घंटे के अंदर। ज़्यादा दूध देने वाली गाय-भैंसों में यह खतरा ज़्यादा रहता है।

मिल्क फीवर के लक्षण

  • पशु का खड़ा न हो पाना या लड़खड़ाना
  • शरीर और कान ठंडे पड़ना
  • मांसपेशियों में कंपन
  • गर्दन को मोड़कर एक तरफ रख लेना
  • खाना-पीना और जुगाली बंद कर देना
  • हालत बिगड़ने पर पशु का बैठ जाना और बेहोशी जैसी स्थिति

मिल्क फीवर का इलाज

इसमें देरी जानलेवा हो सकती है। तुरंत पशु चिकित्सक को बुलाएं। डॉक्टर आमतौर पर नसों के ज़रिए कैल्शियम बोरोग्लूकोनेट चढ़ाते हैं। अपने स्तर पर इलाज करने की कोशिश न करें।

मिल्क फीवर से बचाव

  • ब्याने से पहले सूखे काल (ड्राई पीरियड) में संतुलित आहार दें
  • खनिज मिश्रण (मिनरल मिक्सचर) नियमित दें
  • ब्याने के तुरंत बाद पूरा दूध एक साथ न निकालें
  • पशु चिकित्सक की सलाह से कैल्शियम सप्लीमेंट दें

2. जेर रुकना (Retained Placenta)

जेर रुकना क्या है?

सामान्य तौर पर ब्याने के बाद कुछ घंटों में जेर (प्लेसेंटा) अपने आप बाहर गिर जाती है। अगर गाय में लगभग 8 से 12 घंटे और भैंस में 12 घंटे से ज़्यादा समय तक जेर न गिरे, तो इसे जेर रुकना कहते हैं।

जेर रुकने के कारण

  • कैल्शियम, सेलेनियम और विटामिन E की कमी
  • कमज़ोर शरीर और खराब पोषण
  • कठिन प्रसव या समय से पहले ब्याना
  • संक्रमण

जेर रुकने के लक्षण

  • योनि से जेर का लटकना
  • बदबूदार स्राव
  • पशु का बेचैन रहना और बार-बार ज़ोर लगाना
  • खाना कम कर देना और दूध घट जाना

क्या करें और क्या न करें?

  • जेर को खींचकर निकालने की कोशिश बिल्कुल न करें। इससे बच्चेदानी को नुकसान और संक्रमण हो सकता है
  • पशु के पिछले हिस्से को साफ रखें
  • 12 घंटे से ज़्यादा हो जाए तो पशु चिकित्सक को दिखाएं
  • जेर गिरने के बाद उसे ज़मीन में गाड़ दें, ताकि संक्रमण न फैले

जेर रुकने से बचाव

  • ब्याने से पहले संतुलित आहार और खनिज मिश्रण दें
  • पशु को साफ-सुथरी जगह पर ब्याने दें
  • प्रसव में अनावश्यक दखल न दें

3. थनैला रोग (Mastitis)

थनैला रोग क्या है?

थनैला रोग थन (ऐन) में होने वाला संक्रमण और सूजन है। यह दुधारू पशुओं की सबसे आम और नुकसानदेह बीमारियों में से एक है, क्योंकि इससे दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों गिर जाती हैं।

थनैला के लक्षण

  • थन का सख्त, गर्म और लाल होना
  • थन में दर्द और सूजन
  • दूध में थक्के, खून या पानी जैसा दिखना
  • दूध का स्वाद बदलना
  • दूध उत्पादन में अचानक गिरावट
  • गंभीर स्थिति में बुखार

थनैला का इलाज

थनैला में सही दवा का चुनाव ज़रूरी है, इसलिए पशु चिकित्सक से जाँच कराकर ही इलाज करें। जल्दी इलाज शुरू करने पर थन को स्थायी नुकसान से बचाया जा सकता है।

थनैला से बचाव

  • दूध दुहने से पहले और बाद में थन को साफ पानी से धोएं
  • दूध दुहने वाले के हाथ साफ हों
  • दुहने के बाद थन को कीटाणुनाशक घोल में डुबोएं (टीट डिपिंग)
  • बैठने की जगह सूखी और साफ रखें
  • दूध पूरी तरह निकालें, थन में दूध न रुकने दें
  • संक्रमित पशु को सबसे आखिर में दुहें

ब्याने के बाद अन्य ज़रूरी बीमारियाँ

  • बच्चेदानी में संक्रमण (मेट्राइटिस): बदबूदार स्राव और बुखार इसके मुख्य लक्षण हैं।
  • कीटोसिस: ऊर्जा की कमी से होता है, जिसमें पशु सुस्त रहता है और दूध घट जाता है।
  • बच्चेदानी बाहर निकलना (यूटेराइन प्रोलैप्स): यह आपात स्थिति है, तुरंत डॉक्टर बुलाएं।

ब्याने के बाद पशु की देखभाल कैसे करें? (आसान चेकलिस्ट)

  1. ब्याने के तुरंत बाद पशु को गुनगुना पानी पिलाएं
  2. नवजात बच्चे को 1 से 2 घंटे के अंदर खीस (कोलोस्ट्रम) ज़रूर पिलाएं
  3. पशु को साफ, सूखी और आरामदायक जगह पर रखें
  4. हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक आहार दें
  5. हरा चारा, सूखा चारा और दाना संतुलित मात्रा में दें
  6. खनिज मिश्रण और साफ पानी हमेशा उपलब्ध रखें
  7. पशु के व्यवहार पर नज़र रखें और असामान्य लक्षण दिखें तो डॉक्टर को दिखाएं

पशु की इम्युनिटी बनाए रखने में पोषण की भूमिका

ब्याने के बाद बीमारियों से बचाव की सबसे मज़बूत नींव अच्छा पोषण है। जब पशु को प्रोटीन और ऊर्जा से भरपूर संतुलित आहार मिलता है, तो उसका शरीर कमज़ोरी से जल्दी उबरता है और संक्रमण का सामना बेहतर तरीके से कर पाता है।

SRNK Group का शुभ लाभ बिनौला खल क्यों खिलाएं?

पशु आहार में बिनौला खल (कपास बीज की खल) को प्रोटीन और ऊर्जा का अच्छा स्रोत माना जाता है, और दुधारू पशुओं के आहार में इसका उपयोग लंबे समय से होता आ रहा है। SRNK Group का "शुभ लाभ" ब्रांड बिनौला खल पशुपालकों के लिए एक भरोसेमंद विकल्प है।

इसे खिलाने के फायदे:

  • ब्याने के बाद कमज़ोर हुए शरीर को ताकत देने में सहायक
  • पशु की इम्युनिटी बनाए रखने में मददगार संतुलित पोषण
  • दूध उत्पादन को सहारा देने वाला पौष्टिक आहार
  • पशु की सेहत और ऊर्जा बनाए रखने में उपयोगी

ध्यान दें: बिनौला खल को हमेशा संतुलित मात्रा में और पशु की उम्र, वज़न और दूध उत्पादन के अनुसार खिलाएं। सही मात्रा के लिए अपने पशु चिकित्सक या पशु पोषण विशेषज्ञ की सलाह लें। पशु को ब्याने के बाद शुभ लाभ बिनौला खल ज़रूर खिलाएं, ताकि उसकी इम्युनिटी बनी रहे और वह स्वस्थ रहे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1. ब्याने के बाद गाय-भैंस को कौन सी बीमारियाँ होने का सबसे ज़्यादा खतरा रहता है?

उत्तर: सबसे आम रोग मिल्क फीवर (दुग्ध ज्वर), जेर रुकना, थनैला, बच्चेदानी का संक्रमण और कीटोसिस हैं।

Q2. मिल्क फीवर कितने दिन में होता है?

उत्तर: ज़्यादातर मामलों में ब्याने के 24 से 72 घंटे के अंदर।

Q3. गाय-भैंस में जेर कितनी देर में गिर जानी चाहिए?

उत्तर: सामान्यतः कुछ घंटों में। 12 घंटे से ज़्यादा समय लगे तो पशु चिकित्सक को दिखाना चाहिए।

Q4. क्या रुकी हुई जेर को हाथ से खींचकर निकाल सकते हैं?

उत्तर: नहीं। इससे बच्चेदानी को चोट और संक्रमण हो सकता है। यह काम डॉक्टर से ही करवाएं।

Q5. थनैला रोग के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

उत्तर: थन में सूजन, गर्मी, दर्द, और दूध में थक्के या पानी जैसा बदलाव।

Q6. ब्याने के बाद पशु को क्या खिलाना चाहिए?

उत्तर: शुरुआत में गुनगुना पानी और हल्का सुपाच्य आहार, फिर धीरे-धीरे हरा चारा, सूखा चारा, दाना, खनिज मिश्रण और शुभ लाभ बिनौला खल जैसा संतुलित पशु आहार।

Q7. पशु की इम्युनिटी कैसे बनाए रखें?

उत्तर: संतुलित आहार, साफ पानी, साफ-सुथरा बाड़ा, समय पर टीकाकरण और ब्याने के बाद पौष्टिक आहार जैसे शुभ लाभ बिनौला खल देकर।

निष्कर्ष

ब्याने के बाद का समय पशु और पशुपालक दोनों के लिए अहम होता है। मिल्क फीवर, जेर रुकना और थनैला जैसे रोग थोड़ी सावधानी, साफ-सफाई और सही पोषण से काफी हद तक रोके जा सकते हैं। लक्षण दिखते ही देर न करें और तुरंत पशु चिकित्सक की सलाह लें।

अपने पशु को स्वस्थ और ताकतवर बनाए रखने के लिए संतुलित आहार दें और ब्याने के बाद SRNK Group का शुभ लाभ बिनौला खल ज़रूर खिलाएं, ताकि उसकी इम्युनिटी बनी रहे।

(नोट: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी बीमारी में पशु चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।)